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Wednesday, March 23, 2016

दुनियाँ है बदली बदली कुछ मैं भी बदल गया

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दुनियाँ है बदली-बदली कुछ मैं भी बदल गया,
इक दिल था जो इंसान में....जाने किधर गया ।

छोड़ा भँवर में उसने जब ताज्जुब तो तब हुआ,
जिसके लिए हर जंग में......मैं खुद उतर गया ।

पत्थर लिए अब घूमता......हर शख्स बदज़ुबां,
इंसान का इंसान से...........रिश्ता बिखर गया ।

यूँ हर तरफ आतंक और...........गुनाह देखकर,
इक जूझता इंसान मुझमें..........आज मर गया ।

दहशत भरे माहौल का........अब देखिये असर,
रौशन हुआ दीया तो समझे...घर ही जल गया ।

----------------------हर्ष महाजन

2212 2212 2212 12