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Wednesday, January 11, 2017

कोई अश्कों से ये पूछे क्यूँ लरजें खूब पलकों पर


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कोई अश्कों से ये पूछे क्यूँ लरजें खूब पलकों पर,
कहीं दिल को है गहरी चोट आये खुद न सड़कों पर |

कहीं कुछ वोट की खातिर कहीं कुछ नोट की खातिर,
कहीं मैखानों में बिकते हैं हलके लोग हलकों पर |

कहीं ऐसा न हो तस्वीर दिल में खुद बदल जाए,
न उठ जाए कहीं एतबार किस्मत की लकीरों पर |

कोई बरसात ऐसी हो जो पानी को ही मय कर दे,
शहर बन जाएगा जंगल लगेगी भीड़ नलकों पर |

अगर फरहाद कोई शहर का सरताज हो जाए,
न उजड़े कोई भी दिलभर करेंगे राज़ मुल्कों पर |


_____________हर्ष महाजन
बहर :-
1222 1222 1222 1222