Thursday, December 29, 2016

अगर समझता यहाँ, मेरे दिल का हाल कोई

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अगर समझता यहाँ, मेरे दिल का हाल कोई,
न रौंद जाता मेरे..........सैकड़ों सवाल कोई ।

न जाने होता रहा...........कैसे ऐतबार फनां,
यूँ कर गया जो मेरी......ज़िन्दगी बवाल कोई ।

ज़ुदा किया था जिन्हें खुद तो कोई बात न थी,
मगर बता दे मुझे....उनके दिल का हाल कोई ।

चिराग-ए-दिल जो हवाले किये हवाओं के फिर,
बचाये गा क्या खुदा......कर खड़ी दिवाल कोई ।

मिटा दे नाम मेरा..............हाथ की लकीरों से,
अगर है दिल में तेरे.........रह गया मलाल कोई ।

-------------------हर्ष महाजन

1212  1122 1212  112(22)

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